Saturday, 25 August 2018

Famous Pandit in Ujjain

श्री रमाकांत जी का परिचय

शिक्षा: एमए दर्शनशास्त्र
पंडित श्री रमाकांत जी धार्मिक अनुष्ठानों में रूचि अपने बालयकाल से ही थी, पंडित जो को समस्त प्रकार के अनुष्ठानो का प्रयोगत्मक ज्ञान एवं सम्पूर्ण विधि विधान की जानकारी पंडित जी के पिता जी से प्राप्त हुयी है, पंडित जी वैदिक अनुष्ठानों में आचार्य की उपाधि से विभूषित है एवं सभी प्रकार के दोष एवं वधाओ के निवारण के कार्यो को करते हुए १५ वर्षो से भी ज्यादा हो गया है। (Famous Pandit in Ujjain)

वर्तमान में पंडित जी पूरी उज्जैन नगरी में कालसर्प पूजा के सर्वश्रेष्ठ विद्वानोँ की श्रेणी में अग्रणी है, कालसर्प पूजा के अलाबा पंडित जी ने नवग्रह शांति, मंगलभात पूजा, मंगलशांति पूजा, रुद्राभिषेक, ग्रहण दोष निवारण, चांडाल दोष निवारण, पितृ दोष निवारण, जैसे अनुष्ठानों को सम्पूर्ण वैदिक पड़ती द्वारा संपन्न किया है, इसके अतिरिक्त महामृत्युंजय जाप, दुर्गा सप्तसती पाठ भी आवश्यकता के अनुसार करते है, पंडित जी कुम्भ विवाह, अर्क विवाह, जन्म कुंडली अध्ययन अवं पत्रिका मिलान में भी सिद्धस्त है, इन समस्त कार्यो के साथ साथ पंडित जी वास्तु पूजन, वास्तु दोष निवारण एवं व्यापर व्यवसाय वाधा निवारण का पूजन भी सम्पूर्ण विधि विधान से करते है।

पूजा और अनुष्ठान जिनमे पंडित जी की विशेषज्ञता हैं:

दोष निवारणार्थ अनुष्ठान
मंगल दोष निवारण (भातपूजन), सम्पूर्ण कालसर्प दोष निवारण, नवग्रह शांति, पितृदोष शांति पूजन, वास्तु दोष शांति, द्विविवाह योग शांति, नक्षत्र/योग शांति, रोग निवारण शांति, समस्त विध्न शांति, विवाह संबंधी विघ्न शांति, नवग्रह शांति

कामना पूर्ति अनुष्ठान
भूमि प्राप्ति, धन प्राप्ति, शत्रु विजय प्राप्ति, एश्वर्य प्राप्ति, शुभ (मनचाहा) वर/वधु प्राप्ति, शीघ्र विवाह, सर्व मनोकामना पूर्ति, व्यापार वृध्दि, रक्षा कवच, अन्य सिद्ध अनुष्ठान एवं पूजन

पाठ, जाप एवं अन्य अनुष्ठान
दुर्गासप्तशती पाठ, श्री यन्त्र अनुष्ठान, नागवली/नारायण वली, कुम्भ/अर्क विवाह, गृह वास्तु पूजन, गृह प्रवेश पूजन, देव प्राण प्रतिष्ठा, रूद्रपाठ/रूद्राभिषेक, विवाह संस्कार

Monday, 13 March 2017

Swami Vivekanand Thoughts in Hindi Part 1

स्वामी विवेकानंद जी, ने सबसे पहले मनुष्य के अच्छे स्वास्थ पर जोर दिया है, उनका मनना ये था की अगर आपका स्वस्थ ठीक है तो आपका मन बुध्दि और आत्मा भी स्वस्थ रहेगा, इस बारे एक बहुत बढ़िया बात है जो में आपको बताता हूँ।

वक बार एक बालक स्वामी जी के पास गया और बोला मुझे वेदों का ज्ञान जानना है बताओ मैं करू, स्वामी जी ने कहा बहुत बढ़िया बात है, पर इसके लिए सबसे पहले रोज १ घण्टे खेल में मैदान में कोई खेल खेलाकरो और जब खेल तुम्हारी रोज की जरुरत बन जाए तब मेरे पास आना में तुमको वेदों के बारे में कुछ जानकारी दूंगा जितनी मेरे पास है।

बालक ने १५ दिन तक वैसा ही किया और फिर स्वामी जी के पास आया, स्वामी जी ने पूछा कैसे हो उसने बताया ठीक हूँ, जैसा आपने बोला था वैसा ही किया, तो स्वामी जी उससे बाते करने लगे, अचानक बालक बोला अच्छा में चलता हूँ मेरा खेलने का समय हो गया, फिर आऊँगा।

स्वामी जी ने बोला कल सुबह आ जाना कल से बात करते है वेदों पर, बालक चला गया और नियत समय पर आ गया, ६ महीने का अध्ययन के बाद उसको वेदों और उपनिषदों का ज्ञान प्राप्त हुआ, एक दिन उनस्ने स्वामी जी से पूछ ही लिया अपने आप आपने कैसे जान लिया की अब में पात्र हो गया हूँ।

स्वामी जी बोला जो व्यक्ति अपने खेल के प्रति निष्ठावान है लगन सील है, वही बाकी ज्ञान के लिए भी उपयुक्त होगा, क्योंकि संसार की प्रत्येक वस्तु आपकी लगन पर ही निर्भर है,जितनी आपकी लगन और निष्ठा है उतनी ही जल्दी आप लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे।